Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  उधर तो फतह की फौज़ें - दस महोर्रम
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उधर तो फतह की फौज़ें उदू में शादमानी है
इधर अन्सारे शह पर तीन दिन से बन्द पानी है

उधर तो आतिशे ग़ैजो ग़जब से सुखऱ् है नारी
इंधर रंगे रुखे शह मिसले खुरशीद अरग़वानी है

अली अकबर की सूरत देखकर हर एक कहता था
पिसर सरवर का यह अहमद की तस्वीरे जवानी है

कमर भी ख़म है दिल भी है शिकस्ता शह का सदमों से
और उस पर क़हर यह बेटे की मय्यत भी उठानी है

गले में तौक़ बेड़ी पाओं में, हाथों में हथकड़ियाँ
गिरे पड़ते हैं आबिद राह में यह नातवानी है

चला मरने जवाँ बेटा तो सरवर ने कहा रोकर
इलाही ख़ैर करना यह पयम्बर की निशानी है

उधर तो फौजे कूफ़ा नहर से सेराब होती है
इधर सिब्ते नबी पर तीन दिन से बन्द पानी है

तड़पती हैं मिसाले बर्क़ प्यासों के लिए मौजें
तलातुम में इसी से अलक़मा का आज पानी है

तमन्ना कर्बला जाने की रहती है सदा दिल को
अगर है तो यही एक 'फिक्र' को रन्जे नेहानी है

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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