Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Mauhharam and all Wafaats
Nauhas
   
  अलविदा बराय दस मर्होरम
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आके खे़मे में कहा शह ने के ख्वाहर अलविदा
मैं भी मरने जाता हूँ एै बिन्ते हैदर अलविदा

बाद मेरे सब्र करना जो मुसीबत भी पड़े
अलविदा एै जै़नबो कुलसूमो मुज़तर अलविदा

जाके आबिद के सरहाने फिर यह बोले शाहेदी
एै मेरे बेकस पिसर बीमारों लाग़र अलविदा

तुम इमामे बक़्त होगे मेरे मर जाने के बाद
सब्र हर हालत में करना बहरे दावर अलविदा

बेड़ियाँ और तौक़ पहनाए तुम्हें गर अशक़िया
बद दुआ करना न एै दिल बन्दे हैदर अलविदा

फिर गले लिपटा के यू बाली सकीना से कहा
एै मेरे सीने पा सोने वाली दुख़तर अलविदा

ज़िद न करना बाद मेरे एै मेरी नूरे नज़र
अब मुहाफिज है तेरा खल्लाके़ अकबर अलविदा

आँसुओं के तार ने दिल की रगें सब तोड़ दीं
चुप रहो रो लेना बेटी मुझसे छुटकर अलविदा

प्यार करके फिर सकीना को उतारा गोद से
और कहा एहले हरम से शह ने रोकर अलविदा

आख़री सोहबत है यह और आखि़री यह गुफ्तुगू
अब न कुछ तुमसे कहूँगा ताबा महशर अलविदा

हिन्द से अब तक न निकले तुम तो एै 'फिक्रे' हज़ी
और रुख़सत कर दिया सरवर को कहकर अलविदा

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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