Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  बोली माँ दे गए तुम दाग़े जुदाई बेटा
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बोली माँ दे गए तुम दाग़े जुदाई बेटा
हाय इस सिन में तुम्हें भी अजल आयी बेटा

तुमको दूल्हा भी न एै लाल बनाने पाई
के सिना सीने पर ज़ालिम ने लगाई बेटा

दिल में हसरत थी कि परवान चढ़ाती तुमको
पर यहाँ आके लुटी मेरी कमाई बेटा-

शह अकेले हैं बस अब सो चुके एै लाल उठो
नींद कैसी अली अकबर तुम्हें आयी बेटा

किस लिए रूठे हो आओ मैं मना लूँ तुमको
कुछ जुबाँ से तो कहो सदक़े यह दाई बेटा

मय्यद आयी अली असगर की तो बोली यह रबाब
नींद इस प्यास में क्योंकर तुम्हें आयी बेटा

दिल में अरमा था के मैं दूध बढ़ाती लेकिन
हुयी पैकाँ से तेरी दूध बढ़ाई बेटा

रात अंधेरी है बियाबान में डर जाओगे
गोद में आओ यह क्या दिल में समाई बेटा

वारी इस दशत में मुझ कोखजली से छुट कर
हाय आग़ोशे लहद तुमने बसाई बेटा

छोटी सी लाश पर एै 'फिक्र' यह माँ कहती थी
घुटनियों चलने न पाए अजल आई बेट

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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