Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  दस मुहर्रम (शाम ग़रीबाँ)
Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats
  Nauha in Hindi Print Nauha in Urdu Print Nauha in Hindi
Print Nauha
Translation of Nauha
Listen to Nauha
Download Mobile Audio
View Nauha on YouTube
Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats Nauhas in various formats
 

 

रोज़े आशूरा पसे कत्ले इमामुल मुत्तक़ीं
मालो ज़र लूटा जलाए खेमाहाय शाहेदीन

एक क़नाते सोखता की आड़ में सब बीबियाँ
खाक पर बैठीं थीं बच्चों को लिए बादिल हज़ीं

एक तरफ़ बच्चे पड़े थे ग़श में भूख और प्यास से
सेरो सेराब उस तरफ़ होने लगीं फौ़जे लईं

जानवर तक फौज के जब पा चुके आबो तआम
तब गिज़ा भेजी पए अतफ़ाल शाहनशाहेदीन

ज़ौजए हुर लेके मशके आब और कुछ रोटियाँ
फौजे आदा से गई जिस वक्त बच्चों के करीब

बीबियाँ संभझीं के आते हैं लईन फिर लूटने
हज़रत जैनब बसद अनदोह फरमाने लगीं

रोते रोते भूखे प्यासे बच्चे सोए हैं अभी
लूट लेना सुबह आकर क़ैद है हम सब यहीं

मैं हूँ बीबी ज़ौज़ए हुर लाई हूँ आबो तआम
बाअदब उसने कहा यूँ आके जैनब के करीं

है गुरस्ना और प्यासे तीन दिन से नौनेहाल
दीजिए पानी उन्हें या ख्वाहरे सुलताने दीन

रख दिया यह कहके फर्शे ख़ाक पर आबो तआम
और खुद भी सर झुका के बैठीं बालाए जमीन

देखते ही रोटियों के टुकड़े और पानी की मशक
हो गया आहो बुका का शोर ऐ 'फिक्रे' हज़ीन

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
| Home | Fikr | Nauhas | Videos | Dictionary | Contact | YouTube | Privacy Policy | Terms & Conditions |