Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  शहीद ज़हर से होना तो था
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शहीद ज़हर से होना तो था हसन के लिए
बना था शिमर का ख़न्जर शहे ज़मन के लिए

है तौक़ आहनी सज्जाद ख़स्ता तन के लिये
और एहले बैत के बाजू फ़क़त रसन के लिए

लिबासे ख़ुल्द जिसे ईद मंे दिया हक़ ने
हजार हैफ़ वह मोहताज़ है कफन के लिये

जवान होने न पाए के रन में कत्ल हुए
थी कमसिनी की शहादत बिने हसन के लिए

थे कर्बला में सद अफसोस रोज़े आशूरा
ज़माने भर के मसाएब शहे ज़मन के लिए

यज़ीद के लिए तो तख़्तो ताज क्यों एै चर्ख़
सरे हुसैन है दरबार में लगन के लिये

जहाँ में शियों का जब तक गिरोह बाकी है
अलम रहेगा अलमदारे सफ़ शिकन के लिए

रसूले पाक जिसे चूमते थे रह-रह कर
छड़ी यजीद की है उस लबोदहन के लिए

फिराक़े पन्जे तने पाक में सदा रोईं
हुयी थी खिलक़ते गम शाह की बहन के लिए

जिन्होंने ख़ल्क में परदे की रस्म जारी की
वह एहले बैत है ज़ालिम की अन्जुमन के लिए

है 'फिक्र' हिन्द में बेताब या इमाम रज़ा
बुला लो रौजए अक़दस पर पन्जेतन के लिए

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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