Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  जनाबे सकीना - एै शह की यतीमा
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माँ छोटी सी मय्यत पा यह रो-रो के पुकारी- एै शह की यतीमा
परदेस में क्या तुम भी ख़फा हो गयीं वारी- एै शह की यतीमा

सब्र आ गया लिपटा के सरे शाहे ज़मन को- क्या इसलिए चुप हो
थी बाप की फुरक़त में सदा गिरिया ओ ज़ारी- एै शह की यतीमा

हैं ज़ख़्म जो कानों में दिखा दो वह पदर को- रुखसार दिखा दो
और पीठ पर दुर्रो के निशा माँ गयी वारी- एै शह की यतीमा

रोती थी शबो रोज़ पदर के लिए एै जाँ- मादर गयी क़ुरबां
क्या पाते ही सर ख़ुल्द गयी तेरी सवारी- एै शह की यतीमा

किस बात पर रूठी हो ज़रा आँख तो खोलो- कुछ मुँह से तो बोलो
सदक़े गयी माँ चाँद सी सूरत पर तुम्हारी- एै शह की यतीमा

कुम्हला गया किस वासते यह फूल सा चेहरा- क्या हाल है तेरा
क्या तू भी सुऐ बाग़े जिनां आज सिधारी- एै शह की यतीमा

ज़िन्दाने बला में है क़यामत का अंधेरा- माँ क्या करे दुखिया
गुरबत में है बे गोरो कफ़न लाश तुम्हारी- एै शह की यतीमा

एै फिक्र' था जिन्दाँ मे बपा शोरे क़यामत- थमती न थी रिक़्क़त
सब एहले हरम कहते थे ब गिरिया ओ ज़ारी- एै शह की यतीमा

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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