Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  इमाम अली (अलै.)
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एै मोमिनो है बीसवी माहे रमाजाँ की - वा हसरतो दरदा
बतलाती है बढ़ती हुयी हसरत यह मकाद्द की - वा हसरतो दरदा

अब नूर न देखेगा कोई शेरे ख़ुदा का - ग़ु़ल होगा बुका का
रौनक है फख़्त एक ही शब बज़मे जहाँ की - वा हसरतो दरदा

जब ज़ख़्मे सरे शाह को जर्राह ने देखा - सर पीट के बोला
उम्मीद नहीं सेहते सरदारे जहाँ की - वा हसरतो दरदा

हर कूचओ बाजार में है शोरे क़यामत - कैसी है मुसीबत
बदली हुयी हालत है हर एक पीरो जबाँ की - वा हसरतो दरदा

हसनैन भी बेताब हैं ज़ैनब भी है मुज़तर - हम रोएँ न क्योंकर
रुखसत है कोई आन में शाहे दो जहाँ की - वा हसरतो दरदा

बिन बाप के बच्चों की बहुत गैर है हालत - थमती नहीं रिक़्क़त
अब कौन ख़बर लेगा यतीमाने जहाँ की - वा हसरतो दरदा

देखा है लहू जब से सरे शाहे हुदा का - अनधेर है दुनिया
बेताब है मौजें भी हर एक बहरे रवाँ की - वा हसरतो दरदा

इस ग़म से सरे मौजे सबा जिन भी हैं गिरियाँ - है हशर का सामाँ
आवाज़ हवाओं से भी आती है फुगाँ की - वा हसरतो दरदा

अब कर यह दुआ हक से मयस्सर हो ज़ियारत - बर आए यह हसरत
आगे नहीं एै 'फिक्र' बस अब ताब बयाँ की - वा हसरतो दरदा

 

Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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