Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  सात महोर्रम
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सातवी माहे अज़ा की आज है एै मोमीनीन
बन्द पानी कर चुके हैं शाह पर आदाए दीन

पहरे बिठलाए गए हैं नहर पर इस वास्ते
ता न पाएँ एक क़तरा भी इमाम-अल-मुत्तक़ीं

जानवर तक नहर से सेराब हों अफसोस है
और तरसे एक कतरे को शहे दुनिया ओ दीन

है यह दिन मखसूस बहरे क़ासिमे गुलगूँ क़बा
हालते इब्ने हसन भी कुछ सुनें अब हाजेरीं

इस क़दर कमसिन था फरजन्दे हसन एै मोमनीं
पुशते मरकब पर बिठाने आए थे खुद शाहे दीन

नासिरों को जमा करके जब शबे आशूर आह
दे चुके सबको श्हादत की ख़बर सुल्ताने दीन

जोड़कर हाथों को क़ासिम ने किया यह अर्ज़ तब
नाम मेरा भी शहीदों में लिखा है या नहीं

शह ने पूछा मौत कैसी है बता एै नौनिहाल
शहद से ज़ायद है शीरी, तब यह बोला वह हसीं

सुन के यह शह ने कहा हाँ तुम भी कल होगे शहीद
और अली असग़र को भी मारेंगे यह आदाए दीन

नामे असग़र सुनते ही क़ासिम ने घबराकर कहा
ऐ चचा खेमों में भी दर आएगे क्या ये लईं

हों फिदा जाने हमारी, किस क़दर गै़रत थी आह
ध्यान से बे परदीगी के हो गए क़ासिम हज़ीन

जिनके परदे का तुम्हें इतना था एै मौला ख़्याल
आम मजमे में खुले सर है वह बाहाले हज़ीन

अब मैं कहता हूँ के आओ शाम के दरबार में
और ज़रा देखो तो हाले इतरते सुल्ताने दीन

अब जिगर फटता है नौहा ख़त्म कर एै फिक्र' जल्द
और दुआ कर यह के दम निकले तो रौज़े के करीब



Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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