Nauhas for Muharram and all Wafaats
Maatams for Muharram and all Wafaats
Nauhas
   
  शबे आशूर - नौ महोर्रम
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ऊदू की फौज में कत्ले शहे बे कस का सामाँ है
हमारा सैय्यदो आक़ा फख़्त एक शब का मेहमाँ है

मिली है मोहलत एक शब की जो आदा से इबादत की
तो सर्फ़े ताअते माबूद हर एक ब दिलो जा है

इसी शब नासिरो को जमा करके शाहे वाला ने
कहा सबसे सहर को कत्ल का मेरे तो सामां है

तुम्हारी गरदनों से अपनी बैयत में उठाता हूँ
जिधर चाहे चले जाओ तुम्हारा हक़ निगेहबां है

कहा हर एक जरी ने गिर के क़दमों पर शहे दीं के
नहीं छूटेगा दामन हमसे जब तक जिस्म में जां है

खुदारा हम ग़ुलामों को न क़दमों से जुदा कीजे
फिदा हो जाएँ हम सब आप पर यह दिल मे अरमाँ है

सन इकसठ जुमे की रात और सन्नाटे का वह आलम
है तारीकी ज़माने भर मे जुल्फ़े शब परेशाँ है

बुला लो कर्बला में 'फिक्र' को एै सैय्यदे वाला
वहीं की सरज़मी पर कब्र हो यह दिल में अरमा है


Please Recite Fateha for Marhoom - Syed Wirasat Ali Rizvi ibne Syed Mustafa Hussain Rizvi.
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